भोपाल से लगभग मात्र 32की.मी की दूरी पे भोपाल रायसेन रोड पे सतलापुर से 5की.मी अन्दर
देसी घुमक्कड़
Saturday, 11 August 2018
महादेव पानी
भोपाल से लगभग मात्र 32की.मी की दूरी पे भोपाल रायसेन रोड पे सतलापुर से 5की.मी अन्दर
Friday, 22 June 2018
ऋषिकेश
यदि आप भी रोजाना की भाग दोड़ भरी ज़िन्दगी से उकता चुकें हे ,और आपको आपका शरीर किसी मशीन की तरह लगने लगा है , तो यह समय हे के आप अपने काम से छोटा सा ब्रेक ले और ऋषिकेश का टिकिट बुक करे जेसा मेने किया था बीते वर्ष मई माह में |
दिल्ली से सीधा ऋषिकेश या फिर हरिद्वार और फिर हरिद्वार से कई प्रकार के वाहन आपको ऋषिकेश पंहुचा देंगे |
वेसे तो आपकी थकान हरिद्वार में गंगा नदी की धारा देख के ही दूर हो जाएगी और जेसे जेसे आप ऋषिकेश की और बढेंगे एक अध्बुध से रोमांच का आपको अनुभव होगा
देश विदेश के साहसिक खेलो में रूचि रखने वाले लोगो के लिए ऋषिकेश एक महत्वपूर्ण स्थान हे, रिवर राफ्टिंग , बनजी जंपिंग, ज़िप लाइनिंग, टिरेकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग इन सभी गतिविधियों के लिए ऋषिकेश एक उपयुक्त स्थान हे, यहाँ की बंजी जम्पिंग और गंगा नदी की रिवर राफ्टिंग तो विश्व भर में प्रसिद्ध हे |
ऋषिकेश में रुकने के लिए कई विकल्प है , हर श्रेणी के होटल और गेस्ट हाउस, आश्रम आपको मिल जायेंगे , वेसे रुकने के लिए यहाँ जंगल कैंप भी काफी प्रसिद्ध हे जो की आपको सम्पूर्ण साहसिक अनुभव देगा |
यहाँ आपको कई एडवेंचर टूर ऑपरेटर मिल जायेंगे जिनके द्वारा विभिन प्रकार की डील आपको मिल जाएगी , वेसे ऋषिकेश में सभी प्रकार की बुकिंग आप ऑनलाइन भी कर सकते है लेकिन मेरा अनुभव है के आप वही पहुच के बुकिंग करे |
दोपहर में ऋषिकेश पहुच के मेने एक जंगल केम्प में बुकिंग कर ली थी , रात को टिमटिमाते हुए तारो से मानो आसमान भर गया हो , ऐसा प्रतीत हुआ जेसे कई वर्षो के बाद इतने सारे तारो को देखा , जंगल में टेंट में रात बिताने का अनुभव भी काफी रोमांचिक होता है ,इन केम्प में खान पान की पूरी विवस्था रहती है |
अगली सुबह 10 बजे राफ्टिंग का समय था
राफ्टिंग दूरी के हिसाब से होती है , मेने 28 किलो मीटर की राफ्टिंग बुक की थी, में अकेला थी इसलिए ऑपरेटर ने मुझे एक दल से जोड़ दिया था , 28 की.मी की राफ्टिंग में कई रैपिड का सामना होता है और गर्मी में गंगा नदी का पवन शीतल जल जब आपके शरीर को छुएगा आपके तन और मन का तनाव,थकावट सब छूमंतर हो जाएगी , 28 की.मी पूरा करने में लगभग तीन घंटे का समय लगा लेकिन वो तीन घंटे मेरे जीवन के अदभुद पलो में से एक हे , मेने यह टूर 2 दिन में पूरा कर लिया था , उन दो दिनों ने मुझमे एक नई उर्जा भर दी थी |
और हा शाम के समय घाट पे गंगा आरती में जाना न भूले ।
निवेदन : कुपया पर्यटन स्थल पे अपने साथ खाने का सामान ले जाये तो उसका कचरा कचरे के स्थान पे ही डाले यहाँ वहा नहीं फेके |
Sunday, 3 June 2018
सोलह खम्बी
पिछले सप्ताह चिडीखो वन अभयारण जाने का विचार बना
चिडीखो में पहले भी जा चुका था , बरसात के बाद वहां के प्राकर्तिक सौंदर्य का बयां सिर्फ चंद वाक्यों में करना मुश्किल है।
वहां पहुचने पे याद आया के वो बुधवार का दिन है और बुधवार को चिडीखो बंद रहता है।
यह बात में पहले से जनता था , अब यह मेरी भूल थी या मेरे भाग्य में किसी नई जगह का भ्रमण लिखा था ।
चिडीखो के मुख्य द्वार पे मुझे एक सज्जन ने बताया के यहाँ से मात्र 3.5 की मी की दूरी पे एक स्थान है वहाँ 10वी शताब्दी का एक ऐतिहासिक स्मारक है और 16वी शताब्दी की एक दरगाह और मस्जिद है, बस फिर क्या था मैने झट से अपनी बाइक को उस दिशा में दौड़ा दिया।
नरसिंहगढ़ जाने वाले मुख्य मार्ग NH12 पे चिडीखो वन अभयारण के मुख्य द्वार से एक रास्ता कोटरा गांव को जाता है
उसी रस्ते पे मुख्य मार्ग से लगभग 3.5 की मी की दूरी पे बिहार नाम का एक गांव है वहां पहुँच के बाये तरफ एक टीले पे यह स्थान है।
टीले पे जाने के मार्ग पे सभी वाहन जा सकते है,
मै भी बाइक के साथ टीले पे पहुँच गया ,
वहां पहुँच के जो नज़ारा मेने देखा वो अदभुद था सीताफल का एक जंगली बाग़ , उसके सामने 16वी शताब्दी के संत पीर हाजी वली की दरगाह हे , दरगाह प्रांगण में एक छोटी सी 16वी शताब्दी की मस्जिद है , पूरा प्रांगण पथरों से निर्मित है,
शांत वतावरण में मोर और कई पक्षीयो की आवाज़ आपको अदभुद शांति का अनुभव देती है।
दरगाह प्रांगण से मिला हुआ एक स्मारक है जिसे सोलह खम्बी के नाम से जाना जाता है , यह 10वी शताब्दी का निर्मित है इसके 16 स्तम्भ आज भी मौजूद है, इन स्तंभों पे परमार काल की शिल्प कला साफ़ दिखाई देती है ।
यहाँ से चिडीखो और नरसिंहगढ़ की पहाड़िया और उसकी हरियाली आपको पचमढ़ी का अनुभव कराएंगी ।
अगर आप परिवार के साथ किसी ऐसे स्थान की तलाश में है जहां प्राकर्तिक सौंदर्य के साथ भीड़भाड़ न हो तो यह स्थान आपके लिए उपयुक्त है।
हा अगर आप वहाँ जाये तो खाने का सामान और पीने का पानी जरूर साथ ले जाये क्योंकि वहां आपको कोई दुकान नहीं मिलेगी।
स्थनीय लोगो का भरपूर सहयोग आपको अथिति देवो भवः की याद दिला देगा।






